वास्तु द्वारा संतुलित किये गए घर में व्यक्ति सुख शांति का अनुभव करता है

  • व्यक्ति की मूलभूत आवश्यकता�"ं में रोटी, कपडा �"र घर अनिवार्य रूप से आते हैं | जहां रोटी �"र कपड़ों में दिन प्रतिदिन विविधिता संभव है वहीँ हमारा घर स्वयं में ही एक व्यक्तित्व के लिए होता है| हमें अपने शरीर के लिए अच्छा- बुरा तो महसूस हो जाता है, पर क्या हम अपने घर के सही गलत का आकलन कर पाते है? क्यों होता है की जैसे ही हम नए किसी घर में शिफ्ट करते हैं तो थोड़े समय के पश्चात ही हमारा सामाजिक दायरा बढ़ने या घटने लगता है ? क्यों रुके हुए काम बन जाते हैं या बने हुए काम बिगड़ जाते है ? क्यूँ स्वास्थ्य में गिरावट आने लगती है या बीमारियाँ इतना घेर लेती हैं कि दवाइयां कम या बिल्कुल असर नहीं करतीं ?
    मित्रों, विचार करें तो समझ पाएंगे की आप तो वही हैं आपका घर बदल गया है | जैसे शरीर के एक अंग का दर्द या असंतुलन कार्य क्षमता प्रभावित करता है, ऐसे ही हमारे घर का स्वास्थय हमारे जीवन के हर पहलू को प्रभावित करता है| 
    अब शरीर के लिए डॉक्टर होता है वैसे ही घर के लिए वास्तु विशेषज्ञ |  मान लीजिये उत्तर पूर्व दिशा में असंतुलन जैसे की टॉयलेट, रसोई घर या दीवारों पर लाल रंग है तो व्यक्ति जीवन के सभी क्षेत्रों में घोर संघर्ष करता है �"र अनायास असफलताएं ही चली आएँगी| इसी प्रकार दक्षिण पश्चिम में बनी टॉयलेट पारिवारिक जीवन के सुखों को ग्रहण लगा देता है| 
    इसके विपरीत वास्तु द्वारा संतुलित किये गए घर में व्यक्ति सुख-शांति का अनुभव, समाज में मान-सम्मान, यश �"र सफलता प्राप्त करता है | एक कुशल वास्तु विशेषज्ञ वास्तु नियमों द्वारा आपकी व्यावहारिक चुनौतियों को ध्यान में रखकर बिना तोड़फोड़ ही समस्या�"ं का समाधान कर देते हैं �"र नवीन वैज्ञानिक यंत्रों द्वारा आप की आज की �"र भविष्य में आने वाली समस्या�"ं का निदान संभव है, आवश्यकता है मात्र आपके एक कदम बढ़ाने की|